Created with Fabric.js 3.4.0 and NBDesigner 2.7 वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णातिनरोऽपराणि।तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-न्यन्यानि संयातिनवानि देही

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